सोमवार, 1 जनवरी 2018

Happy New Year 2018: एक दिन, दिल्ली की गलियों में

मेरा भाई समन्वय। नए साल की शुरुआत भाई ने दिल्ली घुमाकर की. ये जो पीठ पर बैग लादे हीरो जैसा लड़का है, घुमक्कड़ बनने के लक्षण इसमें हैं. अगली बार भाई के साथ किसी अच्छी जगह  जाने का मूड बना है. कुछ दिन बाद, अभी नहीं. 
हां तो मैं बता रहा था कि ये हुमायूं का मक़बरा है. अब इस मक़बरे की कहानी मेरी ज़ुबानी तो अभी सुनेंगे नहीं आप, क्योंकि थोड़ा टाइम लगेगा लिखने में जो कि आज कम है.  हम हौज ख़ास विलेज भी गए थे. झील देखने. मक़बरा भी  वहीं ही है. किसकी है मैंने ध्यान नहीं दिया. 
आज तस्वीरें देख लीजिए, कभी बाद में कहानी भी विस्तार से लिखूंगा. हां तो फ़ोटो की शुरुआत भाई से ही करते हैं क्योंकि इस ट्रिप का हीरो तो भाई ही है. 






समन मस्त मूड में. 

ये मॉडलिंग बस समन के कहने पर. वरना मुझे तो फ़ोटो खिंचवाने ही कहां आता है.

हीरो बनाकर ही मानेगा भाई।

अली ईसा खाँ नियाज़ी के मक़बरे के पास. समन आराम करते हुए.



भाई! ऐसा पोज तो कभी मैंने दिया ही नहीं था।

समन की फ़ोटो दिव्य है.


बांछें खिलने ही वालीं थी कि रुक गईं.

सेल्फ़ी ही इस युग का युगधर्म है.

योग करते समन बाबू।


इतना ख़राब पोज मेरे अलावा कोई नहीं दे पाएगा। मैंने कॉपी राइट लगवा लिया है.

ये भी कम थोड़े ही है किसी से. 
ये है कमाल का फ़ोटो है भाई।


हौज ख़ास विलेज वाले झील में बत्तख. मेरे गांव में तो यही कहते हैं इन्हें यहां अंग्रेज़ी में कुछ कहते हों तो नहीं पता मुझे. 
हां तो कहना भूल गया. विश यू ऑल ए वेरी हैप्पी न्यू ईयर. मस्ती कीजिए, ख़ुश रहिए...मेरे साथ जुड़े रहिए...सुझाव देते रहिए.....शुभमस्तु! मिस यू...जल्द ही मिलते हैं कुछ नया लिखकर. 



                                                  

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (03-01-2018) को "2017. तुमसे कोई शिकायत नहीं" (चर्चा अंक-2837)

    पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    नववर्ष 2018 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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