शनिवार, 7 अक्तूबर 2017

मधुशाला में लॉक लगाओ भरो क्षीर से तुम प्याला




                                           मधुशाला में लॉक लगाओ भरो क्षीर से तुम प्याला
                                           औ उसमें हॉर्लिक्स मिलाकर पीते रहो जैसे हाला।
                                           बल बुद्धि विद्या तीनों बढ़ेंगी पर ये याद सदा रखना
                                          भारत माता की जय बोलो खुलवाओ तुम गौशाला।।


( सपने में बच्चन जी आए थे ये कहने कि दोस्त, मैंने मधुशाला लिखी है और तुमसे गौशाला भी लिखी नहीं जा रही...यहमा हमार कवनो दोष नाहीं है..सब बच्चन जी कहिन है सपना मा, औ हां! इ कप हमार नाहीं है)

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल सोमवार (09-10-2017) को
    "जी.एस.टी. के भ्रष्टाचारी अवरोध" (चर्चा अंक 2751)
    पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    करवाचौथ की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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