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शनिवार, 18 फ़रवरी 2017

यहां जब भी हवा चलती

यहां जब भी हवा चलती
तो आँखे नम सी होती हैं
कभी जब सोचता तुमको
तो रातें कम सी होती हैं,
अज़ब है ग़म का भी आलम
न मैं कुछ कह के कह पाऊँ,
बिना तेरे मेरी सांसें
बड़ी बेदम सी होती हैं।।
फोटो - पीयूष कौशिक
(पुराने पन्नों से😊)

1 टिप्पणी:

  1. शानदार पोस्ट ... बहुत ही बढ़िया लगा पढ़कर .... Thanks for sharing such a nice article!! :) :)

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